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कोरोना वायरस संक्रमण को खत्म करने की दवा बनाने का दावा करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव एक बार फिर विवाद में फंस गए हैं, बाबा रामदेव का झूठ बेनकाब

दिल्ली : कोरोना वायरस संक्रमण को खत्म करने की दवा बनाने का दावा करने वाले योग गुरु बाबा रामदेव एक बार फिर विवाद में फंस गए हैं । पूर्व में जिस तरह उन्होंने कोरोना महामारी को खत्म करने के लिए नाक में सरसों का तेल डालने की हास्यास्पद बात कही थी,उसी तरह कोरोना को खत्म करने की दवाई का दावा भी अब सवालों और संदेह के घेरे में है । इस बार सवाल खुद सरकार ने उठाए हैं तो मामला बेहद पेचीदा हो गया है।


 


कल बाबा रामदेव की कोरोना दवाई लॉच करने के 4 घंटे के बाद ही उसके प्रचार-प्रसार पर केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने रोक लगाकर जता दिया कि इस बार बाबा की मनमानी नहीं चलेगी। चौंकाने वाली बात यह है कि उत्तराखंड सरकार ने भी अब बाबा के कोरोना दवाई के दावे को बेनकाब कर दिया है।


 


 


 


उत्तराखंड की आयुर्वेद ड्रग लाइसेंस अथॉरिटी ने बाबा की दवा के लिए लाइसेंस को भी झुठला दिया है । अथॉरिटी ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है की बाबा रामदेव ने उनसे इम्यूनिटी बूस्टर और खांसी जुकाम की दवा के लिए लाइसेंस लिया था । लेकिन उस लाइसेंस को कोरोना दवाई का प्रचारित कर लोगों को भ्रमित किया गया । इसके खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने बाबा रामदेव और बालकृष्ण को नोटिस जारी कर दिया है । इसी के साथ ही देश के कई जगहों से पंतजलि के सर्वेसर्वा बाबा रामदेव और सीईओ आचार्य बालकृष्ण पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। फिलहाल रामदेव और बालकृष्ण की मुश्किलें बढ़ गई है।


 


गौरतलब है कि पूर्व में बाबा रामदेव ने सोशल मीडिया पर दो दावें किए हैं जो खूब वायरल हुए थे। हालांकि रामदेव के दोनों ही दावे झूठे पाए गए है। यही नहीं बल्कि उत्तराखंड के जिला नैनीताल के रामनगर में तो इन बेतूके दावो के खिलाफ तहरीर तक दी गई थी। तहरीर देने वाले सोशल वर्कर और समाजवादी जन मंच के अध्यक्ष मुनीष कुमार है। जो कहते हैं कि बाबा रामदेव ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कोरोना महामारी पर झूठी और भ्रमित बात कर घोर अपराध किया है। जिसके चलते इनपर मुकदमा होना चाहिए। मुनीष कुमार ने रामदेव के खिलाफ रामनगर थाने में यह तहरीर 28 अप्रैल को ही दे दी थी।


 


 


 


जिन मामलों को आधार बनाकर मुनीष कुमार ने रामदेव के खिलाफ थाने में कंपलैन्ड की थी उनमें पहले में बाबा सांस रोकने के जरिए कोरोना जांच का दावा कर रहे थे। बाबा रामदेव के अनुसार 30 सेकंड तक सांस रोकना कोविड-19 के लिए एक स्व – परीक्षण का तरीक़ा है और दूसरा यह की सरसों का तेल नाक पर लगाने से वह वायरस को पेट में ले जाता है जहां एसिड वायरस को ख़त्म कर देता है। लेकिन इन दावों को किसी भी वैज्ञानिक रीसर्च का समर्थन या पुष्टि नहीं मिली है। याद रहे कि रामदेव ने यह दावें आज तक के इ- अजेंडा में 25 अप्रैल 2020 को एक 24 मिनट लंबे वीडियो में किए थे।


 


हालांकि रामदेव की यह वीडियो अविश्वसनीय करार दिए जानें के बाद यू ट्यूब ने इसे अपने प्लेटफार्म से हटा दिया है। वीडियो के पाँचवे मिनट में रामदेव कोविड-19 के ‘सेल्फ़ – टेस्ट’ की बात करते हैं। वह कहते हैं की अगर एक व्यक्ति किसी भी बीमारी के साथ या बिना 30 सेकंड या 1 मिनट तक अपनी सांस रोक सके और उनकी सांस ना फूले तो वो स्व-परीक्षण कर रहे हैं की वह कोविड-19 से संक्रमित नहीं है। उन्होंने वीडियो में इसका प्रदर्शन करके भी दिखाया।


 


 


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