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आँसू छोड़ रही लाल कलम

आज आँसू छोड़ रही लाल कलम,
लाल स्याई से लिखती इंकलाब कलम,
आत्महत्या करते युगलों की प्रीत लिखूँ,
टूटे दिल के बिछोह के गीत लिखूँ,
या लिखूँ नववधु मिटाती सिंदूर पर,
या फुटपाथ पर सो रहे मजदूर पर,
माँ के टूटे ह्रदय का प्यार लिखूँ,
युवाओ पर होता लाठी प्रहार लिखूँ,
या लिखूँ गरीब किसान लाचारी पर,
शिक्षित नौजवान की बेरोजगारी पर,
बिन दवा मरती बिटिया बेचारी पर,
धधकती दहेज में अबला नारी पर,
क़लम कांपती,निर्लज्ज बलात्कारी पर,
शहीद बेटा बापू के कंधों पर लिखूँ,
फेरते नजर उन सियासी अंधों पर लिखूँ,
भारत माँ से ग़द्दारी करते जयचंदो पर लिखूँ,
देश खोखला करते काले धंधों पर लिखूँ,
सब देख देख हो गई निराश कलम,
फ़ूट फ़ूट कर रोई मेरी उदास कलम,
आज आँसू छोड़ रही लाल कलम।
लाल स्याई से लिखती इंकलाब कलम।।।
लेखक 
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नरेंद्र राठी
सलाहकार-श्री हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड)
संबद्ध-श्री राज बब्बर(सांसद राज्य सभा)
सदस्य - प्रबंधन समिति- लाजपत राय कॉलेज।।।

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